Sunday, 8 March 2015

मेरी बात अंजली के साथ....











  आज है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और महिलाओं को समर्पित इस दिन में जानते हैं आज की महिलाओं की राय एक महिला की जुबानी .जी हाँ, अंजली सिंह मेरी सहपाठी और दोस्त के साथ की गयी ढेर सारी छोटी-मोटी बातें और कई सवाल-जवाब जिनका इन्होने बड़ी बेबाकी से जवाब दिए और अपने जीवन के कुछ अच्छे और बुरे अनुभवों को हमारे साथ बाटा , पेश उनसे की गयी बातों के कुछ प्रमुख अंश .


  • आपके नाम से शुरू करते हैं तो कैसे पड़ा आपका नाम ?

मेरा नाम .... मेरे नाम की एक इंटरेस्टिंग कहानी है . पहले मेरा नाम शिखा था . लेकिन मुझे ये नाम अच्छा नहीं लगता था क्योकि सब लोग मुझे इस नाम से चिढाते थे . जैसे सिखड़ी सिक्कड़ ... तो सेंट्रल पब्लिक स्कूल आजमगढ़ में एडमिशन के समय मैंने अपना नाम खुद ही बदल लिया था और ये अंजली नाम रख लिया .जो कि कुछ कुछ होता है फिल्म से प्रेरित था .


  • इस नाम का मतलब क्या है ?

पहले तो मुझे नहीं पता था लेकिन नेट पर सर्च किया तो पाया की इसका मतलब होता है गिफ्ट टू गॉड. इस नाम से काफी नुकसान भी हुआ क्युकी हर एक्साम्स और प्रेजेंटेशन में आगे ही जाना पड़ता रहा है पर फिर भी ये नाम पसंद है मझे.


  • अपने परिवार के बारे में कुछ बताइए?

मेरे परिवार में मैं मेरे माँ पापा, दो छोटी बहनें और एक छोटा सा प्यारा सा भाई. मैं सबसे बड़ी हूँ. मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि बहोत ही साधारण है. एक मिडिल क्लास फॅमिली. मेरा होम टाउन मऊ और आजमगढ़ है.


  • हर परिवार में कोई एक सदस्य होता है जो सारे अहम् निर्णय लेता है आपके घर में वह कौन है? और उनका किस हद तक योगदान है आपके ज़िन्दगी के निर्णय में?

मेरे परिवार में मेरे पापा ही फैसले करते हैं. और रही बात मेरे ज़िन्दगी से सम्बंधित फैसलों की तो वह मैं ही लेती हूँ और मेरे पापा की पूरी सहमती रहती है. चाहे मेरी पढाई हो या करियर हो सब में मेरे माँ बाप का पूरा सहयोग और साथ होता है.


  • आपकी स्कूल लाइफ कैसी रही ? उससे जुड़े कोई किस्से ?

वैसे तो मेरी स्कूल लाइफ बहुत अच्छी थी मगर मम्मी पापा के पुलिस में होने के कारण मुझे बार बार अपना स्कूल बदलना पड़ा. इंटरमीडिएट तो घर पे ही रहकर किया . स्कूल के समय में दोस्ती तो बहुत हुई पर कोई परमानेंट नही रह पाए. फिर दो दोस्त सुमित और सुभाषिनी आज भी मेरे संपर्क में है और बहोत अच्छे दोस्त हैं.


  • स्कूल के बाद आगे की पढाई का फैसला और वो दौर कैसा रहा?

इंटरमीडिएट तक तो घर वालो के ही साथ रही. मेरा पसंदीदा विषय मैथमेटिक्स था और अभी भी है. मैं बी टेक करना चाहती थी मगर 12th  के अंत में मैंने पाया की बी टेक का स्कोप कुछ खास नहीं लगा और कुछ अलग करने की चाह में मेरा झुकाव बी कॉम ऑनर्स की तरफ हो गया. इंटरमीडिएट के बाद एक साल का गैप भी हो गया था क्योकि उस समय मेरे माँ बाप का ट्रान्सफर हो रहा था तो कुछ दिक्कत आ गयी थी. मगर मैंने अपना समय बर्बाद न करते हुए ICA  DIPLOMA का कोर्स कर लिया. फिर लखनऊ यूनिवर्सिटी में बी.कॉम ऑनर्स में दाखिला ले लिया.


  • लखनऊ विश्वविद्यालय में आपने दाखिला लिया मगर लखनऊ ही क्यों? कैसा रहा आपका ये फैसला?

जैसा कि मैंने बताया उस समय ट्रान्सफर की वजह से मेरा एक साल का गैप हुआ उस समय मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लिए भी अप्लाई किया था मगर जा नहीं पाई काउंसलिंग  के लिए फिर एक साल बाद जब सोचा की अप्लाई करू तो मेरिट ज्यादा होने के कारण लखनऊ विश्वविद्यालय आने का फैसला लिया और यहाँ पर आराम से एडमिशन हो गया.


  • लखनऊ जैसे बड़े शहर में आजमगढ़ से आने के बाद आपने क्या फर्क पाया और यहाँ के माहौल में कैसे ढाला ?

कुछ बहुत बड़ा फर्क नहीं पाया. मगर एडमिशन लेने के बाद मेरे दादा जी की डेथ हो गयी थी तो दो महीने बाद आई मैं. शुरुआत में थोडा दिक्कत हुआ घरवालों की बहोत याद आती थी रोती भी थी मगर धीरे धीरे दोस्त बनते गए और फिर सब अच्छा हो गया. इन सबमे सबसे पहले मेरी दोस्ती सौम्या से हुई आप तो उसे जानते ही हैं हमारी क्लासमेट. फिर उसके बाद वैशाली से हुई.  फिर तो हमारा इतना अच्छा ग्रुप बन गया की घर ही जाने का मन नहीं करता था.


  • हॉस्टल लाइफ के उतार-चढ़ाव बारे में आपका क्या कहना है ?

हॉस्टल लाइफ ... वैसे तो बहुत अच्छी थी मगर डर्टी पॉलिटिक्स भी बहोत हुए. लोग जुड़े अलग हुए, अच्छे बुरे सारे अनुभव हुए जैसे की 3rd  इयर के दौरान बॉयज हॉस्टल के लड़कों की बद्तमीज़ी बहुत बढ़ गयी थी. गंदे कमेंट्स और पत्थरबाजी रोज का काम हो गया था. हमने उसके खिलाफ अवाज़ भी उठाई मगर कुछ खास कदम नहीं उठाये गए और हमें ही दबा दिया गया. ओवरआल बहोत चुनौतीपूर्ण रहा हमारा हॉस्टल लाइफ फिर भी खूब मज़े किये जैसे मैगी पार्टी, घूमना फिरना , नाईट टॉक्स, जी डी, सब यादगार हैं.


  • ग्रेजुएशन तो हो गया. अब आगे JOURNALISM करने की कैसी सोची? और फ्यूचर प्लानिंग क्या है आपकी इस फील्ड में ?

मुझे याद है मेरे ग्रेजुएशन टाइम में मुझे एक असाइनमेंट मिला था. लखनऊ के  5 एन्तेर्प्रेनेउर का interview लेने का. असाइनमेंट के दौरान मुझे इन् लोगों के interview लेने में बहुत अच्छा महसूस हुआ तभी मेरे मन में एक और अलग मतलब जर्नलिज्म करने का ख्याल आया फिर परिस्थितियां बनती गयीं मुझे प्रोत्साहन मिलता गया और मैंने यह कोर्स ज्वाइन कर लिया. इस फील्ड में मैं P. R. ज्वाइन करना चाहूंगी.


  • P. R. ही क्यों ? 

पहले मैं P. R. के बारे में कुछ नहीं जानती थी फिर जागरण नॉएडा में काउंसलिंग के दौरान मुझे पता चला की यह गर्ल्स के लिए ज्यादा अच्छा हैं. स्कोप ज्यादा है. मुझे सेलिब्रिटीज के साथ रहना और फेमस होना है. मुझे लगता है की मैं इस फील्ड अच्छा कर सकती हूँ इसलिए.


  • अपने लाइफ के बारे में आपका क्या कहना है ? प्यार और दोस्ती के क्या मायने हैं आपके लिए ?

मेरी लाइफ.. मैं बहुत इमोशनल हूँ जल्दी सेंटी हो जाती हूँ. यह मेरी कमजोरी भी है और ताकत भी . मैं लोगों पे जल्दी भरोसा कर लेती हूँ . लोगों ने इसका फायदा भी उठाया लेकिन इसकी वजह से दोस्त भी अच्छे मिले जो अब तक मेरे साथ हैं... रही बात दोस्ती की तो दोस्ती बहोत अच्छे से निभाती हूँ. मेरे दोस्त मेरी ज़िन्दगी हैं.
और प्यार .... प्यार एक बहोत ही अच्छी चीज है अगर उसमे अंडरस्टैंडिंग, लॉयल्टी, और रेस्पेक्ट हो तो. और मुझे लगता है मैं प्यार के लिए नहीं बनी हु क्योकि दोस्ती तक तो ठीक है मगर कमिटमेंट मेरे से नहीं हो पाता. कुछ बुरे अनुभव रहें हैं.


  • आपका ड्रीम बॉय कैसा होना चाहिए ?

ड्रीम बॉय.. जैसा की बताया मैंने मेरे को समझे मेरी केयर करे और रेस्पेक्ट करे. लुक्स बहुत मैटर नहीं करता मेरे जैसा ही लुक्स हो. मेरे से पहले उसकी चाहे ८- १० गर्लफ्रेंड्स क्यों न हों लेकिन जब मेरे साथ हो तो केवल मेरे ही साथ हो, ईमानदार हो .


  • आप पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहीं हैं. एक छोटे शहर की लड़की को इतने मौके नहीं मिलते हैं. अब तक तो उनकी शादी के विचार बनने लगते हैं ऐसे में आपको कैसा लगता है ?

हाँ सही कहा आपने. एक छोटे शहर की लड़कियों को इतना मौका नहीं मिलता मेरे भी घर में मेरी शादी करने की पूरी योजनायें चल रहीं हैं लेकिन इन् सबमे मुझे मेरी पढाई को लेकर कोई कम्प्रोमाइज नहीं करना पड़ा. मेरे मम्मी पापा शादी ढूंढने के साथ साथ मेरी पढाई पर कोई रोक नहीं लगाया. हाँ मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता की मेरी शादी अभी हो क्युकी शादी के बाद पढाई का कोई मतलब नहीं और तब मैं अपने निर्णय खुद नहीं ले पाऊँगी. तो अभी मैं पढना चाहती हूँ फिर शादी. और मेरी दोनों बहने भी पढ़े. शादी तो होनी ही है जल्दी क्या है.


  • शिक्षा प्रणाली के बारे में आपका क्या मत है?

मेरे अनुसार हमारे देश में अभी भी पारंपरिक तरीके से पढाई होती है जिसमे बदलाव लाना जरुरी है. क्लासेज को और रोचक बनाने के तथ्यों को जोड़ना चाहिए जिससे स्टूडेंट्स का उत्साह बढे. जैसे प्रयोगात्मक पढाई पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. केवल लेक्चर क्लास से कुछ नहीं होगा. जैसे हमारे मुकुल सर . वो हमेशा कुछ ऐसे फैक्टर्स ढूंढ के रखते हैं अपनी क्लास में जिससे की स्टूडेंट्स का इंटरेस्ट बना रहता है.

  • आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है आज की महिलाओं के जीवन के बारे में आपका क्या कहना है ?

आज की महिलाएं मल्टी टास्किंग हैं. वो घर के साथ साथ देश और समाज के विकास में भी पूरा सहयोग दे रहीं हैं. इनको शशक्त बनाना जरुरी है. सबसे ज्यादा जरुरी है कि युवाओं की गलत सोच इनके प्रति बदले. अपने आस पास की महिलाओं का रेस्पेक्ट करना सीखें. रेस्पेक्ट करेंगे तो नजरिया भी बदलेगा.
औरतों को भी एक दुसरे के प्रति जिम्मेदार और समझदार होना चाहिए क्योकि अगर हम ही एक दुसरे को नहीं समझेंगे तो कोई और क्या समझेगा. दूसरी औरतों को dominate करने की जगह एक दुसरे का साथ दें . पश्चिमी सभ्यता गलत नहीं है. हमे सही और गलत का फर्क करना आना चाहिए क्योकि अच्छे और बुराई हर चीज में होती है. ये हमारी समझ पे निर्भर है कि हम किन चीजों से अच्छी बाते सीखते है और किनसे बुरी.

 तो ये थी अंजली सिंह जिन्होंने बिलकुल बिंदास होकर अपने ज़िन्दगी की कुछ बातों और अनुभव से हमें दो चार कराया. और एक नजरिया दिया कि आम लोगों की लाइफ भी काफी हप्पेनिंग हो सकती है बस ज़रूरत है तो थोडा adventurous  होने की .